
Last Updated:September 10, 2026, 15:28 IST
Khade Hanuman Temple dispute: उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर विवाद के बीच साध्वी हर्षानंद गिरि यानी हर्षा रिछारिया मंदिर पहुंचीं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि बाबा हनुमान भक्तों को बिना मांगे बहुत कुछ देते हैं और प्रार्थना की कि उन्हें जरूरत पड़ने पर मंदिर के लिए आवाज उठाने की शक्ति मिले. उन्होंने सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों का समर्थन करते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन धार्मिक आस्था का सम्मान भी होना चाहिए. उनका सुझाव है कि मंदिर को यथास्थान रखते हुए सड़क चौड़ीकरण के साथ उसका बेहतर स्वरूप में पुनर्निर्माण किया जाए.

उज्जैन खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं साध्वी हर्षानंद गिरि
उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरि, जिन्हें हर्षा रिछारिया के नाम से भी जाना जाता है, वह मंदिर पहुंचीं. यहां उन्होंने विधि-विधान से भगवान खड़े हनुमान का पूजन-अर्चन किया. पूजा के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा हनुमान बिना मांगे ही भक्तों को बहुत कुछ प्रदान करते हैं. उन्होंने प्रार्थना की कि उन्हें इतनी शक्ति और साहस मिले कि आवश्यकता पड़ने पर वे पूरी श्रद्धा के साथ बाबा के लिए अपनी आवाज उठा सकें.
साध्वी हर्षानंद गिरि ने सिंहस्थ 2028 के लिए चल रहे विकास कार्यों को लेकर कहा कि वे विकास के कार्यों के खिलाफ नहीं हैं और सरकार के साथ हैं. उनका कहना है कि उज्जैन का विकास और सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन इसके साथ धार्मिक आस्था का भी सम्मान होना चाहिए.
खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि अब आगे इस तरह के प्रयास नहीं होने चाहिए. सड़क चौड़ीकरण और शहर के विकास के साथ मंदिर को यथास्थान रखते हुए उसके बेहतर स्वरूप में पुनर्निर्माण का रास्ता निकाला जा सकता है.
सरकार और प्रशासन को दो दिन का समय-हर्षानंद गिरि
साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि उन्होंने सरकार और प्रशासन को दो दिन का समय दिया है. उनका कहना है कि इस अवधि में प्रशासन मंदिर पहुंचकर क्षमा याचना करें, भगवान का पूजन करें और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांग पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो वे अनशन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगी.
फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर को लेकर प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं. अब देखना होगा कि मंदिर की आस्था और सिंहस्थ की विकास योजनाओं के बीच प्रशासन किस तरह संतुलन कायम करता है.
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Ujjain,Madhya Pradesh
First Published :
September 10, 2026, 15:28 IST


