
Last Updated:September 10, 2026, 14:05 IST
बालाघाट में बीते दो महीने में 28 से ज्यादा बच्चों ने अपनी जान गवाई है. मलेरिया, मीजल्स और कुपोषण से बच्चों की जानें गई. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैगा बहुल क्षेत्रों में पशुपालन को व्यवसाय के तौर पर बढ़ावा देने पर जोर दिया था. अब पशुपालन विभाग गांव-गांव पहुंचकर बकरी, मुर्गी और गाय-भैंस पालन के जरिए ग्रामीणों के आर्थिक विकास की पहल कर रहा है.
बीते दो महीने बालाघाट के लिए काफी कठिन रहे. 28 से ज्यादा बच्चों ने अपनी जान गवाई है. मलेरिया, मीजल्स और कुपोषण से बच्चों की जानें गई. ऐसे में जब उन इलाकों में लोग पहुंच रहे हैं. ऐसे में यह देखा गया है कि बैगा समुदाय में आर्थिक असमानता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव बालाघाट आए थे. ऐसे में उन्होंने उन इलाकों में पशुपालन पर जोर देने की बात की थी. इसमें बकरी पालन, मुर्गी पालन, गाय-भैंस पालन पर जोर देने की बात की थी. अब जमीन पर पशुपालन विभाग बैगा बाहुल्य गांवों में जाकर लोगों को पशुपालन को व्यवसाय के तौर पर प्रोत्साहित करने गांव-गांव जा रहे हैं. वह तमाम प्रभावित ग्रामों पहुंच कर ग्रामीणों के आर्थिक विकास की पहल चल रही है. लेकिन वहां जमीन पर कौन सी समस्या आ रही है. लोगों को क्या समस्या यह समझेंगे, लोकल 18 की खास रिपोर्ट…
मध्य प्रदेश शासन ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संरक्षित जनजातियों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना शुरू की है. इसमें बैगा या संरक्षित जनजाति का कोई भी शख्स योजना का लाभ लेना चाहता है उन्हें 90 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा. इसमें सिर्फ 10 प्रतिशत का अंशदान हितग्राही की जेब से जाएगा. वहीं, बालाघाट में यह राशि भी कम्युनिटी फंडिंग से ही दिया जा रहा है.
जानिए योजना में क्या मिलता है
इस योजना के तहत हितग्राहियों को दो दुधारू गाय या दो मुर्रा भैंस दी जाती है. इसमें पशु कम से कम गाय सात लीटर दूध और भैंस से कम से कम आठ लीटर प्रतिदिन दूध देने वाली होनी चाहिए.
बालाघाट में चार ब्लॉक लांजी, बिरसा, बैहर और परसवाड़ा में योजना चलेगी. दरअसल, वहीं पर बैगा जनजाति निवासरत है. ऐसे में दो गाय के लिए 1 लाख 90 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा. वहीं, शासन की तरफ 2 लाख 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता और हितग्राही को 25 हजार रुपए जमा करेंगे होंगे.
भैंस के साथ मिलेगी ट्रेनिंग भी
इस योजना में पहले पशुपालन यानी हितग्राही को भैंस पालने से पहले ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें भैंस या गाय के अलावा पशु बीमा तीन सालों के लिए, दवा के लिए, पशु आहार तीन महीने तक और पशु के ट्रांसपोर्ट का भी खर्च दिया गया.
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Balaghat,Madhya Pradesh
First Published :
September 10, 2026, 14:05 IST


