
Last Updated:September 10, 2026, 17:28 IST
मां से शुरू हुआ मिट्टी का यह हुनर अब बेटे की पहचान बनता जा रहा है.इस परिवार की खास बात यह भी है कि आदित्य के साथ उनकी बहन वेनवी खेडेकर भी गणेश प्रतिमा बनाना सीख चुकी हैं. हालांकि, इस साल बेटी बाहर पढ़ाई कर रही हैं, इसलिए आदित्य ने अकेले ही प्रतिमा बनाने की जिम्मेदारी संभाली है. एक तरफ मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी, दूसरी तरफ गणेश उत्सव के लिए अपने हाथों से प्रतिमा तैयार करने का जुनून आदित्य दोनों जिम्मेदारियां साथ लेकर चल रहे हैं.
खंडवा में गणेश उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई है. इसी बीच शहर के एक परिवार की ऐसी कहानी सामने आई है, जहां मां ने बेटे को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने का हुनर सिखाया और देखते ही देखते यह काम परिवार की परंपरा बन गया. खास बात यह है कि गणेश प्रतिमा बनाने वाला युवा कोई मूर्तिकार नहीं, बल्कि MBBS की पढ़ाई कर रहा आदित्य खेडेकर है, जो पिछले करीब 12 सालों से अपने हाथों से मिट्टी के गणेश जी बना रहा है. इस बार आदित्य ने मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा से प्रेरणा लेकर घर पर ही उनकी प्रतिमा तैयार की है. पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के बीच समय निकालकर आदित्य ने महज दो दिन में प्रतिमा का ढांचा तैयार कर लिया है. अब इसमें रंग भरने का काम बाकी है.
आदित्य के परिवार में मिट्टी के गणेश बनाने की शुरुआत करीब 12-13 साल पहले हुई थी. उस समय खंडवा में कर्फ्यू लगा हुआ था. गणेश उत्सव के लिए बाजार से प्रतिमा लाना आसान नहीं था. परिवार में उस समय बच्चे छोटे थे और घर पर ही छुट्टियां चल रही थीं. ऐसे में आदित्य की मां प्रतिभा मनीष खेडेकर ने सोचा कि इस बार गणेश जी की प्रतिमा घर पर ही मिट्टी से बनाई जाए. प्रतिभा ने अपने बच्चों के साथ मिलकर मिट्टी की प्रतिमा तैयार की और उसी की घर में स्थापना की. इसके बाद धीरे-धीरे आदित्य और उनकी बहन भी मां के साथ प्रतिमा बनाने लगे. देखते ही देखते मां से सीखा यह हुनर बच्चों की रुचि बन गया और अब यह परिवार हर साल अपने हाथों से गणेश जी की प्रतिमा तैयार करता है.
अखबार और खबरों से मिला मिट्टी के गणेश का विचार
आदित्य बताते हैं कि उनके माता-पिता शुरू से ही अखबार पढ़ने और खबरें देखने के शौकीन रहे हैं. मिट्टी की प्रतिमा और पर्यावरण को लेकर भी परिवार में लगातार चर्चा होती थी. इसी वजह से परिवार ने तय किया कि बाजार से POP की प्रतिमा लाने के बजाय घर पर ही मिट्टी के गणेश जी बनाए जाएं. आदित्य का कहना है कि मिट्टी की प्रतिमा बनाने से उन्हें अपनी परंपरा से जुड़ने का मौका मिलता है. सबसे खास बात यह है कि प्रतिमा अपने हाथों से तैयार होती है, इसलिए उससे भावनात्मक जुड़ाव भी ज्यादा रहता है.
MBBS की पढ़ाई के साथ बना रहे गणेश प्रतिमा
आदित्य खेडेकर इस समय खंडवा के नंदकुमार सिंह चौहान मेडिकल कॉलेज में MBBS फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने इस बार भी गणेश जी की प्रतिमा बनाने का काम नहीं छोड़ा. आदित्य ने बताया कि आमतौर पर एक प्रतिमा तैयार करने में करीब 8 से 10 दिन लग जाते हैं, लेकिन इस बार उनकी परीक्षा थी. परीक्षा की तैयारी के साथ प्रतिमा भी बनानी थी, इसलिए उन्होंने समय निकालकर करीब दो दिन में प्रतिमा तैयार कर ली. अभी प्रतिमा में रंग भरने का काम बाकी है. इस बार उन्होंने मुंबई के लालबाग के राजा की प्रतिमा देखकर उसी तरह की प्रतिमा बनाने की कोशिश की है. पहले परिवार खेत की मिट्टी इस्तेमाल करता था, लेकिन उसमें क्रैक ज्यादा आने के कारण अब वे साडू मिट्टी का इस्तेमाल करते हैं, जो मूर्ति बनाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है.
घर पर ही विसर्जन, मिट्टी फिर पौधों में
आदित्य बताते हैं कि मिट्टी के गणेश जी बनाने और स्थापित करने का एक फायदा यह भी है कि विसर्जन के लिए नदी या किसी जल स्रोत पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. परिवार घर में ही प्रतिमा का विसर्जन करता है और उस मिट्टी को गमलों में डाल देता है. आदित्य के मुताबिक, अपने हाथों से बनाई प्रतिमा को घर में स्थापित करने से एक अलग तरह का जुड़ाव महसूस होता है. हर साल अपनी पसंद और सोच के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा बनाने का मौका भी मिलता है.
मां ने शुरू की परंपरा, अब बेटा बेटी आगे बढ़ा रहे
आदित्य के पिता डॉक्टर मनीष खेडेकर बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत उनकी पत्नी प्रतिभा ने की थी. उस समय बच्चे छोटे थे और कर्फ्यू के कारण बाजार से गणेश जी की प्रतिमा नहीं मिल पाई थी. इसके बाद उनकी पत्नी ने घर पर मिट्टी से प्रतिमा बनाकर उसकी स्थापना की. दो साल बाद बच्चों ने भी खुद मूर्ति बनाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनकी बनाई प्रतिमाएं बड़ी और बेहतर होती गईं और लोगों को भी पसंद आने लगीं. अब परिवार पिछले कई वर्षों से इसी तरह घर पर गणेश जी बनाकर उनकी स्थापना करता आ रहा है.
डॉक्टर मनीष खेडेकर कहते हैं कि POP की प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद उनके पूरी तरह नहीं घुलने को लेकर पर्यावरण की चिंता रहती है. ऐसे में उनका परिवार मिट्टी के गणेश जी को प्राथमिकता देता है. वे लोगों से भी अपील करते हैं कि अगर संभव हो तो बाजार से प्रतिमा खरीदने के बजाय अपने घर पर ही मिट्टी के गणेश जी बनाने की कोशिश करें.
About the Author
with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…
और पढ़ेंLocation :
Khandwa,Khandwa,Madhya Pradesh
First Published :
September 10, 2026, 17:28 IST


