
खंडवा का तीन पुलिया ब्रिज इन दिनों अपनी अधूरी कहानी को लेकर चर्चा में है. जिस ब्रिज को महज 24 महीने में बनकर तैयार होना था, उसे शुरू हुए करीब 8 साल बीत चुके हैं, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है. शहरवासियों के लिए यह ब्रिज सुविधा बनने के बजाय लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है. रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ता है.
इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद से खंडवा लोकसभा सीट पर 3 सांसद, विधानसभा में 3 विधायक और जिले में 5 कलेक्टर बदल चुके हैं, लेकिन तीन पुलिया ब्रिज की तस्वीर नहीं बदल सकी. 24 महीने की डेडलाइन वाला यह प्रोजेक्ट सालों बाद भी अधूरा है.अब एक बार फिर अधिकारियों के निरीक्षण के बाद ब्रिज का मुद्दा सामने आया है. आखिर यह ब्रिज कब पूरा होगा और शहरवासियों को ट्रैफिक की परेशानी से कब राहत मिलेगी?
निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर-एसपी, जताई नाराजगी
तीन पुलिया ब्रिज का हाल जानने के लिए खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और एसपी अगम जैन भी मौके पर पहुंचे. निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण कार्य और जंक्शन की व्यवस्था को देखा.अधिकारियों ने भी ब्रिज के काम में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर ब्रिज का काम कब तक पूरा होगा. मौके पर जंक्शन और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी कई बिंदुओं पर चर्चा हुई.
2017 में मंजूरी, 2018 में वर्क ऑर्डर
तीन पुलिया ब्रिज की कहानी आज की नहीं है. वर्ष 2016-17 में तत्कालीन सांसद नंदकुमार सिंह चौहान ने केंद्रीय परिवहन मंत्रालय से इस ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दिलाई थी.इसके बाद सितंबर 2017 में भूमिपूजन हुआ और 1 अक्टूबर 2018 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया. प्रोजेक्ट के तहत ब्रिज के निर्माण की पहली डेडलाइन 30 सितंबर 2020 तय की गई थी.यानी जिस काम को तय समय के मुताबिक 2020 तक पूरा हो जाना चाहिए था, वह कई साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया.
इस दौरान बदल गए सांसद, विधायक और कलेक्टर
ब्रिज की निर्माण यात्रा के दौरान खंडवा की राजनीति और प्रशासन में भी कई बदलाव हुए.2021 के उपचुनाव में ज्ञानेश्वर पाटिल सांसद चुने गए. सांसद पाटिल भी समय-समय पर ब्रिज का काम जल्द पूरा करने के निर्देश देते रहे.वहीं खंडवा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2013 में देवेंद्र वर्मा विधायक चुने गए और उनका कार्यकाल नवंबर 2023 तक रहा. इसके बाद दिसंबर 2023 में कंचन तनवे विधायक चुनी गईं.इस दौरान जिले में कलेक्टर भी बदलते रहे. लेकिन इन तमाम बदलावों के बीच तीन पुलिया ब्रिज की अधूरी तस्वीर जस की तस बनी रही.
चिड़िया मैदान के जंक्शन पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान चिड़िया मैदान पर बन रहे जंक्शन को लेकर भी ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठे.ट्रैफिक टीआई देवेंद्रसिंह परिहार ने जंक्शन की व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हरसूद रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन और बसों के रेलवे स्टेशन की ओर जाने में रांग साइड की स्थिति बन सकती है. आनंद नगर की तरफ से आने वाले वाहनों के कारण भी जंक्शन पर गलत डायरेक्शन बनने की बात सामने आई.इस पर एसडीओ ब्रिज सोलंकी ने बताया कि भोपाल में 90 डिग्री ब्रिज से जुड़ी घटना के बाद जंक्शन के प्लान में बदलाव किया गया है.कलेक्टर और एसपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जंक्शन का डिजाइन तैयार करने के साथ मौके पर बस निकालकर भी व्यवस्था को जांचकर दिखाया जाए, ताकि निर्माण पूरा होने के बाद ट्रैफिक की नई समस्या खड़ी न हो.
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
ब्रिज के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर अधिकारियों की नाराजगी इतनी रही कि निर्माण एजेंसी से जुड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए.अधिकारियों का कहना है कि इतने लंबे समय से चल रहे इस प्रोजेक्ट को अब और लटकाया नहीं जा सकता. शहरवासियों को जल्द से जल्द इस अधूरे ब्रिज से राहत मिलने की उम्मीद है.
नागरिक बोले- बच्चे बड़े हो गए, ब्रिज अब तक नहीं बना
तीन पुलिया ब्रिज को लेकर शहरवासियों में भी नाराजगी है. जागरूक नागरिक मुलु राठौड़ कहते हैं कि उन्होंने इस ब्रिज को बनते-बनते कई साल देख दिए.वे कहते हैं, “यह ब्रिज बनते-बनते बच्चे बड़े हो गए. करीब 10 साल से इसे बनते देख रहे हैं, लेकिन पता नहीं कब पूरा होगा और खंडवा की जनता की मुसीबत कब कम होगी.”मुलु राठौड़ का आरोप है कि ब्रिज के काम को समय पर पूरा कराने के लिए राजनीतिक स्तर पर उतना दबाव नहीं बनाया गया, जितना बनाया जाना चाहिए था. उनका कहना है कि जनता लंबे समय से परेशान है और अगर काम की यही रफ्तार रही तो ब्रिज को पूरा होने में अभी और लंबा समय लग सकता है.वे व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि अगर सबसे ज्यादा समय में बनने वाले ब्रिज का कोई रिकॉर्ड बनाया जाए तो शायद खंडवा के तीन पुलिया ब्रिज का नाम उसमें आ जाए.
सुविधा के इंतजार में शहर
तीन पुलिया ब्रिज का मकसद शहर में ट्रैफिक को आसान करना और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देना था. लेकिन निर्माण में देरी के कारण फिलहाल शहरवासियों को इसके फायदे के बजाय परेशानी ज्यादा झेलनी पड़ रही है.अब कलेक्टर-एसपी के निरीक्षण और अधिकारियों की नाराजगी के बाद लोगों को उम्मीद है कि ब्रिज का काम वास्तव में रफ्तार पकड़ेगा.24 महीने की डेडलाइन से शुरू हुई तीन पुलिया ब्रिज की कहानी अब करीब 8 साल बाद भी अधूरी है. इतने सालों में जनप्रतिनिधि और अधिकारी बदल गए, लेकिन खंडवा के लोगों का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है.

